नाम---डीसी त्रिपाठी
राज्य --छत्तीसगढ़
विधा---ग़ज़ल
काफ़िया---आब
रफ़ीद-- इक्षानुसार
संपर्क --9893900105
#ग़ज़ल
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ज़िंदगी ने नहीं देखा ,अबतलक कोई ख़्वाब ।
ऐसी बहार आयी नहीं जो करदे लाजबाव।।
रात भर इंतज़ार में बैठा रहा उसके ।
घटाओं में छुप के बैठा चाँदनी का महताब।।
लब पे इब्तिसाम बनावटी लगी मुझे ।
झूठी रही सच्चाई उम्मीद है सराब ।।
इश्रत में शिफ़ा हो ये जरूरी तो नहीं है।
अच्छा नहीं सेहत के लिए पालना इताब।।
दीदार के इरादे से मुख़ातिब था तिरी ओर।
तेरे बदन पे देखा नहीं जोड़ा वो शहाब ।।
आग़ाज हो रहा है जीवन नई डगर पर ।
आहिस्ता सरक रहा है रुख़ से तेरे नक़ाब।।
दिवाकर तिरी मोहब्बत का असीर हो गया है।
तेरे हुश्न के उजाले में लिख दूँ कोई क़िताब।।
दिवाकर चंद्र त्रिपाठी
रायपुर-- छत्तीसगढ़ ।
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