Monday, October 21, 2019

बिहार से कवि डॉ. संजीव शमा की रचना- प्रेम का स्वरूप


कवि - डॉ. संजीव शमा
झंझारपुर, मधुबनी, बिहार
शीर्षक - *प्रेम का स्वरूप*
संपर्क - 9934430045
*प्रेम का स्वरूप*

प्रेम, प्यार, मोहब्बत इश्क है अनुराग है ।
नेह ,स्नेह ,प्रणय,आसक्ति,अनुरक्ति है राग है ।
प्रेम के अलग-अलग नाम हैं  पर हैं सब प्रेम ही।
सबने अपने अपने जीवन में किया है प्रेम ही ।
प्रेम शाश्वत है , पवित्र है , प्रेम बिना जीवन नहीं ।
प्रेम विराट है , प्रेम है कल्पना प्रेम बिना वरण नहीं ।
माँ-बेटे का प्यार, भाई-बहन का प्यार भी प्रेम है ।
पिता-पुत्री का प्यार, पति- पत्नी का प्यार भी तो प्रेम है ।
प्रेम है तो हर मौसम ख़ुशगवार है ।
बिन प्रेम कोई कैसे कह दे किसी से प्यार है ।
प्रेम से प्रेमी-प्रेमिका प्रेम से ही
मजनूँ लैला है ।
प्रेम 'मैं' से नहीं 'हम' से है प्रेम
प्रेम से ही छैला है ।
प्रेम शक्तिशाली प्रेम बलवान है ।
प्रेम की सीढ़ी चढ़ भक्त हनुमान है ।
प्रेम एक भाव है , प्रेम एक छांव है ।
प्रेम है तो है कवि वरना कवि बे पांव है ।
प्रेम बिना कविता का झूठा संसार है ।
हर चीज है अधूरा है, प्रेम जीवन आधार है ।
प्रेम पर एक डायरी प्रेम ही किताब है ।
गीत, ग़ज़ल , रुबाई, प्रेम आफताब है ।
नवगीत, नज़्म, दोहा, छंद, रुबाई सभी प्रेम है ।
प्रेम शायर की है शायरी, विरह की ताप भी प्रेम है ।
*डॉ.संजीव शमा*
*झंझारपुर, मधुबनी, बिहार*

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