Monday, October 21, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की रचना- विवाह में खर्च

नाम श्री स्वपन बोस
शीर्षक विवाह में खर्च
मोबाइल 9340433481
पता जुगानी केम्प
  विवाह  है खोज सच्चे जीवन साथी के लिए ।
मिल जाए अगर सच्चा जीवन साथी ,जीवन सवर जाता है ।
                    पर विवाह का खर्च
                    जब बढ़ जाता है
कन्यादान कर पुण्य का फल
कर्ज में बदल जाता है ।
                     दो दिलों का बंधन है विवाह दहेज ,लेना देना पाप है।
दिखावे से हो नहीं सकतीं शुभ विवाह , दहेज तो समाज का अभिषाप है ।
               भुर्ण हत्या , और दहेज की आग में कितनी-कितनी बेटीयां जल जाती है ।
               जन्म देने को बेटी स्वयं मां भी घबराती है ।
         पढ़ा लिखाकर बड़ा कर
          बेटी की विवाह करना पड़ता है ।
रहे समाज में मान-सम्मान के खातिर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है ।बेंड बाजा और बारात
 
                खाना पीना सजावट
                 सोना चांदी और नगद विवाह में खर्चो का मेला है
               ख़ुश रहने की आयोजन है विवाह ,
विवाह से परिवार बनता है ।
अतिरिक्त खर्च अगर वर वधू
को मिल जाए तो , वर्षों परिवार
का खर्च चल सकता है ।
               विवाह से ही आगे चलकर ईश्वर पाया जा सकता है ।
पति-पत्नी में हो अगर सच्चा प्यार
तो घर एक मंदिर बन जाता है ।

1 comment:

  1. very nice , beautiful line for marriage at condition or dahej ....������

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