नाम -- जितेश्वरी साहू सचेता
शीर्षक ---- " दर्द "
राज्य ----- छत्तीसगढ़
कुछ दिनों से दर्द बढ़-सा गया है
परदा था कोई हट-सा गया है।
धुंधली -सी आरज़ू थी कोई
बेदम होकर घूंट -सा गया है।
आशियाना बनाया था खंडहर में
दीवार-दर टूट-सा गया है ।
इंसा की बस्ती में इंसा कहां है
खुद से ही खुद गुम -सा गया है ।
दरिया था गम का समंदर हुआ
सारा का सारा डुब - सा गया है।
आंधियां जोरों की चल रही आजकल
च़राग आखिरी बुझ - सा गया है।
जितेश्वरी साहू सचेता
महासमुंद (छत्तीसगढ़ )
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