नाम -मीरा आर्ची चौहान
राज्य -36गढ़
शीर्षक -शिव अभिषेक
कल मेरे पड़ोस में
पिट रही थी
कंचन
सिर्फ इसलिए
कि वह
आत्मनिर्भर
बनना
चाहती है
सुबह शाम
सब्जी बेचना
ही रोजगार
उसका।
उसका पति
भी बेचता है
कपड़ा
किंतु अलग ही
शान है
उसकी।
सुबह से ही
पानी के
बदले पीता
है शराब
बीबी के
बनाए नाश्ते का
कोई मोल नहीं।
थकी हारी
वह महिला
जोड़ती है
पाई पाई।
खरीदती है
चांवल
बनाती है
सब्जी
मुरझाए भाजी
और अधमरे
भिंडी का।
उसका पति
लौटता है
शाम को
नशे की
धुत में।
पटक देता है
उसकी सब्जी
और पके
भोजन को।
थकी हारी
पत्नी रो
पड़ती है
जिसके
आने का
वह
भूखे-प्यासे
इंतजार कर
रही थी
वही उधेड़
रहा था
सपने।
ये वही
पति हैं
जिसके खातिर
वह रखी थी
बरसों से
सावन का
व्रत
मांगी थी
मन्नत और
किया था
शिव अभिषेक।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ,छग
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