नाम - डॉ सुनीता अग्रवाल:सौम्या
राज्य - असम
शीर्षक - मैं मामूली रचनाकारा!
विधा - गीत।
राज्य - असम
शीर्षक - मैं मामूली रचनाकारा!
विधा - गीत।
गीत
*मैं मामूली रचनाकारा*
*मैं मामूली रचनाकारा*
आसमान के तुम हो तारा!
मैं मामूली रचनाकारा!!
मैं मामूली रचनाकारा!!
प्रेम बीज जब हो बरसाते।
सच कह दूँ तुम खूब लुभाते।।
लेकिन तुमने जग ललकारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
सच कह दूँ तुम खूब लुभाते।।
लेकिन तुमने जग ललकारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
ऊँच नीच की भींत बड़ी है।
बीच हमारे भीड़ खड़ी है।
लड़ पाओगे क्या तुम यारा?
मैं मामूली रचनाकारा!!
बीच हमारे भीड़ खड़ी है।
लड़ पाओगे क्या तुम यारा?
मैं मामूली रचनाकारा!!
शब्द शब्द में उलझ सुलझ कर।
संग संग भावों में बह कर।
कब बन बैठे उभय सहारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
संग संग भावों में बह कर।
कब बन बैठे उभय सहारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
न्याय,प्यार क्यों दोनों अंधे?
मौलिक हक को कहते धंधे?
इनके बिन हों नहीं गुजारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
मौलिक हक को कहते धंधे?
इनके बिन हों नहीं गुजारा,
मैं मामूली रचनाकारा!!
*आसमान के तुम हो तारा!*
*मैं मामूली रचनाकारा!!*
*मैं मामूली रचनाकारा!!*
डॉ सुनीता अग्रवाल:सौम्या
दन्त-चिकित्सक।
मो.9435727659
दन्त-चिकित्सक।
मो.9435727659

very very nice.बहुत ही सुन्दर और मनोरम तथा बोधगम्य कविता है।
ReplyDeleteभावपूर्ण रचना!!
ReplyDeleteVery beutiful composition
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