2. कवि:- संजय वासनिक
शीर्षक:-कुछ लोग
पता:- चेंबुर , मुंबई, महाराष्ट्र
भ्रमणध्वणी :- ९८६९०८१४८४.
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*कुछ लोग*
भीड़ में भी अक्सर
अकेले होते है
तनहाई से बातें करते हैं
कुछ लोग...
मुश्किल से
दिन गुजारते हैं,
रातों में अक्सर जागते हैं
कुछ लोग....
महफिलों में
खामोश रहते हैं,
खुद से बहस करते हैं
कुछ लोग....
छुपाते हैं अक्सर
दिल की लगी को
अकेले में बहुत रोते है
कुछ लोग...
दिल की गहराइयों में
उतर जाते हैं,
दिल्लगी को भुलाए
ना भुल पाते हैं
कुछ लोग...
किनारो से प्यार
करते है वो,
संमंदर की गहराई को
सीनेमे बसाते हैं
कुछ लोग....
# संजय वासनिक
email:-smwasnik@gmail.com
बढीया संजय.
ReplyDeleteIts really a nice poem sir...
ReplyDeleteDil ko chune wali kavya-rachana
ReplyDeleteDil ko chune wlai kavya - rachana
ReplyDeleteBahot khub
Aaj har ek aadmi k jivan ki sacchai.....bahut sundar👌👌
ReplyDeleteAahe Bhado
ReplyDeleteवाह वाह। आदमी के जीवन की दूसरी पहलू यही है। कुछ लोग उपर की तरह हैं नहीं तो " तुम इतना क्यों मुस्करा रहे हो, क्या गम है जो छिपा रहे हो।"
ReplyDeleteबहोत खूब
ReplyDeleteVery nice sir..!
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteHow You get such meaningful words & lines, which gives ,& show reality
After long time ,I am lucky to read such nice poem.
सुंदर. शुभेच्छा
ReplyDeleteबहुत बढिया कविता
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