Monday, October 14, 2019

महाराष्ट्र से कवि संजय वासनिक की रचना - कुछ लोग

2. कवि:- संजय वासनिक
शीर्षक:-कुछ लोग
पता:- चेंबुर , मुंबई, महाराष्ट्र
भ्रमणध्वणी :- ९८६९०८१४८४.
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*कुछ लोग*

भीड़ में भी अक्सर
अकेले होते है
तनहाई से बातें करते हैं
कुछ लोग...

मुश्किल से
दिन गुजारते हैं,
रातों में अक्सर जागते हैं
कुछ लोग....

महफिलों में
खामोश रहते हैं,
खुद से  बहस करते हैं
कुछ लोग....

छुपाते हैं अक्सर
दिल की लगी को
अकेले में बहुत रोते है
कुछ लोग...

दिल की गहराइयों में
उतर जाते हैं,
दिल्लगी को भुलाए
ना भुल पाते हैं
कुछ लोग...

किनारो  से प्यार
करते है वो,
संमंदर की  गहराई को
सीनेमे बसाते  हैं
कुछ लोग....
# संजय वासनिक
email:-smwasnik@gmail.com

12 comments:

  1. Dil ko chune wlai kavya - rachana

    Bahot khub

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  2. Aaj har ek aadmi k jivan ki sacchai.....bahut sundar👌👌

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  3. वाह वाह। आदमी के जीवन की दूसरी पहलू यही है। कुछ लोग उपर की तरह हैं नहीं तो " तुम इतना क्यों मुस्करा रहे हो, क्या गम है जो छिपा रहे हो।"

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  4. Very nice sir..!

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  5. Very nice
    How You get such meaningful words & lines, which gives ,& show reality

    After long time ,I am lucky to read such nice poem.

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  6. सुंदर. शुभेच्छा

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  7. बहुत बढिया कविता

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