Wednesday, October 23, 2019

पंजाब से कवित्री प्रिया की प्रकाशित रचना- अनाथ हूं


कवयित्री का नाम-प्रिया
शीर्षक-अनाथ हूँ
जिला-गुरदासपुर
राज्य-पंजाब


मां बाप की आंख का तारा हूं दुनिया कहती ,न मगर हत्यारा हूं।।
अपने हाथो अपने  खाब  जलाये है।
जीने के सब अरमान भूलाये है
कोई कुछ भी बोले ,अंग्रजा को बहुत प्यारा हूं।
संचित डिग्रिया काम न आ सकी।
हरियाली न खुशहाली ला सकी।
अपनो के हाथो गयी दुत्कारा हूं।
मां बाप छोड़ जब चले गये
हाये!विचार तब छले गये।
मिष्ठान नही मैं खारा हूं।
मैं वो पृष्ठ कोरा ठहरा।
जिसे फैंक दिया गया गहरा ।
मगर जीने की एक धारा हूं।
अपने अपने हो न सके।
चैन से हम तो सौ न सके।
जिज्ञासा भरा एक नारा हूं।
मां बाप अनमोल खजाना है।
जीवन में नही रुलाना है।
अंधकार नही उजियारा हूं।
प्रिया,पंजाब

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