नाम,,, सुनीता लुल्ला
शीर्षक,,, शपथ
राज्य,,, तेलंगाना
गीत / शपथ
शीर्षक,,, शपथ
राज्य,,, तेलंगाना
गीत / शपथ
है *शपथ* तेरी , तुझे हर रात चलना
दीप मेरे जल तुझे क्या हो गया है
दीप मेरे जल तुझे क्या हो गया है
पथ तुझे आलोक से भरना ही होगा
ये अंधेरा पार तो करना ही होगा
आँधियाँ कितनी ही आयें , जल प्रखर तू
ये महासागर , तुझे तरना ही होगा
नियति ने तेरी यही लिखी कहानी
भाग्य पर तेरे कोई क्या रो गया है ?
ये अंधेरा पार तो करना ही होगा
आँधियाँ कितनी ही आयें , जल प्रखर तू
ये महासागर , तुझे तरना ही होगा
नियति ने तेरी यही लिखी कहानी
भाग्य पर तेरे कोई क्या रो गया है ?
नेह तेरा है हृदय , मत भूलना तू
गोद में सुख की मगर मत झूलना तू
है निरन्तर साधना तुझको ये करनी
प्राप्ति कुछ भी नहीं है , झेलना तू
तू है केवल दूत , है कर्तव्य तेरा
प्राप्य तेरा अब कहीं पर खो गया है
गोद में सुख की मगर मत झूलना तू
है निरन्तर साधना तुझको ये करनी
प्राप्ति कुछ भी नहीं है , झेलना तू
तू है केवल दूत , है कर्तव्य तेरा
प्राप्य तेरा अब कहीं पर खो गया है
पर अंधेरा आज ढल कर ही रहेगा
अब उषा का स्वप्न पल कर ही रहेगा
भोर का तारा कहीं से आ रहा है
जो समय को आज छल कर ही रहेगा
खग कुलों ने गान देखो हैं सजाये
आज कोई रंग सा यूँ बो गया है ,,,,,,,
अब उषा का स्वप्न पल कर ही रहेगा
भोर का तारा कहीं से आ रहा है
जो समय को आज छल कर ही रहेगा
खग कुलों ने गान देखो हैं सजाये
आज कोई रंग सा यूँ बो गया है ,,,,,,,
✍✍ सुनीता लुल्ला

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