Wednesday, October 23, 2019

तेलंगाना से कवित्री सुनीता लुल्ला जी की रचना- शपथ


नाम,,, सुनीता लुल्ला
शीर्षक,,, शपथ
राज्य,,, तेलंगाना
गीत / शपथ


है *शपथ* तेरी , तुझे हर रात चलना
दीप मेरे जल तुझे क्या हो गया  है
पथ तुझे आलोक से भरना ही होगा
ये  अंधेरा  पार  तो  करना  ही  होगा
आँधियाँ कितनी ही आयें , जल प्रखर तू
ये  महासागर ,  तुझे  तरना  ही  होगा
नियति ने तेरी यही लिखी कहानी
भाग्य पर तेरे कोई क्या रो गया है ?
नेह  तेरा  है  हृदय  , मत  भूलना तू
गोद में सुख की मगर मत झूलना तू
है निरन्तर साधना तुझको ये करनी
प्राप्ति   कुछ  भी  नहीं  है ,  झेलना तू
तू  है  केवल  दूत ,  है  कर्तव्य  तेरा
प्राप्य  तेरा अब कहीं पर खो गया है
पर  अंधेरा  आज  ढल कर ही रहेगा
अब उषा का स्वप्न पल कर ही रहेगा
भोर  का  तारा  कहीं  से  आ  रहा है
जो समय को आज छल कर ही रहेगा
खग  कुलों  ने  गान  देखो  हैं  सजाये
आज कोई रंग सा यूँ बो गया है ,,,,,,,
✍✍ सुनीता लुल्ला

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