Wednesday, October 23, 2019

छत्तीसगढ़ से कवित्री अनिता सुभाष देशमुख की रचना खुद की बात करूँ


कवियत्री का नाम-अनिता सुभाष देशमुख
विषय: खुद की बात करूँ
राज्य-छत्तीसगढ़(चंदना, राजिम)


चलो खुद की बात करूँ,
खुद की बात करूँ।
आज मैं स्वयं से
कुछ पल की मुलाकात करूँ
सूरत से साँवली
अबोध मेरी सीरत है।
सत्य पर चलती हमेशा
यही मेरी तीरथ है।
क्या हूँ मैं आखिर,
खुद की नजरों में,
रहती हूँ गुम मैं,
खुद की  ही पहरों में।
गम को अपनें मैं,
आज उनके हवालात करूँ,
खुद की बात करूँ
चलो खुद की बात करूं,
आज मैं स्वयं से,
कुछ पल की  मुलाक़ात करूँ।
लइका पन म जब अब्बड़ ,
पड़ेंव हव बीमार,
संसो करे मोर बर,
मोर पूरा परिवार।
दाई ददा करे मोर बर
अब्बड़ दुलार,
मोर हँसी के बिना,
छा जाए घर म अंधियार।
माँ के आंखों की तारा थी मैं,
पापा के जीने की सहारा थी मैं।
मेरे इलाज को बहुत,
दौड़ वो लगाए है,
इलाज के खातिर पापा मेरे
कंधे उठाकर नदी पार तक कराए हैं
अपनी हर लेखनी मैं,
इनके खयालात करूँ।
खुद की बात करूँ
चलो खुद की बात करूँ
आज मैं स्वयं से ,
कुछ पल की मुलाक़ात करूं
दवाई के नई होइस
जब कोनो असर,
ठीक करे बर लगाइस
कई मंदिर के चक्कर।
मिलिस उन्हें जाके असली ट्रिक,
करिस कुलेश्वर नाथ मोला एकदम ठीक।
विनती हुई स्वीकार, क्योकि...
था श्रद्धा अपार,
न जाता कोई खाली,
जो आता इनके द्वार।
पिता के लिए है बहुत
मेरे दिल मे अदब
उनके बेटी होने का,
है मुझे बहुत गरब।
लोग कहते खुदा को
क्या देखा है कोई,
मैं कहती हूँ  हाँ क्योकि....
मेरे पापा में मुझे दिखता है रब।
जिंदगी ये मेरी सारी ,
मैं उनकी खुशियों के हवालात करूँ,
खुद की बात करूँ
चलो खुद की बात करूँ
---
....✍@nita ©®

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