Saturday, September 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की रचना- मैं हिन्दी हूं

नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक मैं हिन्दी हूं
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़
कविता मैं हिन्दी हूं

मैं हिन्दी हूं वतन मेरा हिंदुस्तान है ।
भाषाओं की रानी हूं ,
देवलिपि संस्कृत से निकली हूं ।

             मैं हिन्दी हूं  वतन
मेरा हिंदुस्तान है ।
राज्य भारत में , अलग-अलग है वेश भूषा
खान पान अलग-अलग हैं।
फिर सब मां भारती को जोड़ती हूं ।
   
                 पुरे विश्व की गौरव हूं मैं ,
विश्व भाषाओं के माथे की बिंदू हूं मैं ,

               मैं वो भाषा हूं  जीवन में कभी गुलामी की बेड़ी में थी ,पर रचनाकारों , कवियों ने मुझे आजादी
दिलवाई ऐसे हिन्दी भक्तों की आभारी हूं मैं

                  अब भी कई
राज्य में , मुझे कम पढ़ा जाता है ।
              पर मेरी प्यार देख़ो वह भी लोगो को हिन्दी समझ में आता है ।

        अटल जी ने मेरा मान बढा़या था ।
थे देश के प्रधानमंत्री
जो संयुक्त राष्ट्र संघ में
हिन्दी में ही भाषण दिया था ।  

              पुरानी इतिहास में मैं हूं ,
मैं गणित , भुगोल ,
हर ज्ञान की भाषा में
मैं हूं ,

              मैं तो हिन्दुस्तान की हर दिल में रहती हूं ,
पर एक जगह जहां बच्चे
शान से पढ़ाई करने , कान्वेंट,इन्गलीश मिडिया
जाते हैं

             वह मैं बस एक विषय की तरह रहती हूं ।

         मैं तो राष्ट्र भाषा हिंदी हूं , मेरा विकास
ही भारत की शान है
पुरे विश्व में हिंदी से ही
पहचान है ।

              किसी वीर सपूत
               भारतीय ने क्या
              खुब कहां था ,
जय हिन्द का सुन्दर नारा
               लगाया था ।

2 comments:

  1. Wow!लगातार लिख रहे आप
    अच्छी रचना,आप दिल से लिखते हैं
    यही खूबी रचना में नज़र आती है।
    शुभकामनाएं

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