नाम:- डी कुमार--अजस्र (दुर्गेश मेघवाल)
मोबाइल नम्बर:-9461302199
पता:- पुराना माटुंदा रोड़ इंद्रा कॉलोनी बून्दी राजस्थान पिन 323001
*स्वरचित रचना*
✍ 📚📚 *हिंदी-शतावली* 📚📚✍
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🙏🏼🙏🏼🙏🏼 *राष्ट्रभाषा और मातृभाषा हिंदी को शत-शत अभिनन्दन*🙏🏼🙏🏼🙏🏼
मन मन्दिर की आरती हिंदी ॥001॥
भारत की माँ भारती हिंदी ॥002॥
हिन्द जनों को तारती हिंदी ॥003॥
ज्ञानी जनों की सारथी हिंदी ॥004॥
शब्द नए नए जारती हिंदी ॥005॥
शब्दकोश को सारती हिंदी ॥006॥
सर्व रूपों को धारती हिंदी ॥007॥
जग भाषा में उदारती हिंदी ॥008॥
नित नए शब्द ढालती हिंदी ॥009॥
आप विद्वता विशालती हिंदी ॥010॥
खुशबु भाषा की मालती हिंदी ॥011॥
नव युग को सम्भालती हिंदी ॥012॥
व्योम पताका विजया हिंदी ॥013॥
संस्कृत की तनया है हिंदी ॥014॥
मात जसोदा जूं मइया हिंदी ॥015॥
कड़क धूप में छइयां हिंदी ॥016॥
बात-बात नई बतिया हिंदी ॥017॥
नई पौध की तितिया हिंदी ॥018॥
चमक-चांदनी रतिया हिंदी ॥019॥
गीतकारों की छमियां हिंदी ॥020॥
रसिकों की मनबसिया हिंदी ॥021॥
चल-चित्रों का रंगिया हिंदी ॥022॥
चंग-मस्तों की भंगिया हिंदी ॥023॥
शुक्ल-हजारी का रसिया हिंदी ॥024॥(रसिया गीत )
बुद्धि जनों की सिद्धिया हिंदी ॥025॥
स्वर्ण-स्वप्नों की निंदिया हिंदी ॥026॥
भारत मात की बिंदिया हिंदी ॥027॥
कुमार की जीव-जिन्दिया हिंदी ॥028॥
हिन्द-जन की जान है हिंदी ॥029॥
स्नेह-सुरा का पान है हिंदी ॥030॥
नागरी-जन जुबान है हिंदी ॥031॥
चेहरों की मुस्कान है हिंदी ॥032॥
भाषाओँ का मान है हिंदी ॥033॥
ब्रह्मा का भी ज्ञान है हिंदी ॥034॥
आत्मज्ञान का भान है हिंदी ॥035॥
सिद्धता और विज्ञान है हिंदी ॥036॥
शब्द-ज्ञान की खान है हिंदी ॥037॥
गीत सुरों का गान है हिंदी ॥038॥
हिन्द का स्वाभिमान है हिंदी ॥039॥
भारत-संघ संविधान है हिंदी ॥040॥
जग का तो अरमान है हिंदी ॥041॥
समझो तो अब शान है हिंदी ॥042॥
जन-जन की पहचान है हिंदी ॥043॥
तन-मन-धन सह प्राण है हिंदी ॥044॥
सब सांसो की श्वास में हिंदी ॥045॥
जन-जन के विस्वास में हिंदी ॥046॥
बीच आम और खास में हिंदी ॥047॥
दिनकर जग-प्रकाश में हिंदी ॥048॥
परसाई परिहास में हिंदी ॥049॥(हरिशंकर परसाई)
खड़ीबोली इतिहास में हिंदी ॥050॥
भिन्न-बोली उजास में हिंदी ॥051॥
फूल-फूल की बास में हिंदी ॥052॥
राष्ट्रीयता के विकास में हिंदी ॥053॥
सरकारों के प्रयास में हिंदी ॥054॥
प्रशासन के प्रश्वास में हिंदी ॥055॥
डी कुमार तन श्वास में हिंदी ॥056॥
काव्य की अभिलाष में हिंदी ॥057॥
साहित्य कुछ खास में हिंदी ॥058॥
सप्त-सुर का इकतार भी हिंदी ॥059॥
जग-प्रभु का सत्कार भी हिंदी ॥060॥
सात समुन्दर उस पार भी हिंदी ॥061॥
भव-सागर जन उद्धार भी हिंदी ॥062॥
बच्चों का बचपन भी है हिंदी ॥063॥
युवकों का युवपन भी है हिंदी ॥064॥
मान उम्र पचपन का भी हिंदी ॥065॥
भाव रखे स्वपन का भी हिंदी ॥066॥
नवरस संग इक रस भी है हिंदी ॥067॥
कई पुण्यों का जस भी है हिंदी ॥068॥
हिन्द-जन के मन-बस भी हिंदी ॥069॥
कई बोलियों का निकष भी हिंदी ॥070॥
भारत भाषा सर्वस्व भी है हिंदी ॥071॥
वीर-विजय ओजस्व भी है हिंदी ॥072॥
कवि चन्द का रास भी है हिंदी ॥073॥
अमीर खुसरो खास भी है हिंदी ॥074॥
घन सेना पदम की आस भी है हिंदी ॥075॥
कबीर रहीम तुलसीदास भी है हिंदी ॥076॥
रामचरित-मानस भी है हिंदी ॥077॥
सत्य का सारस भी है हिंदी ॥078॥
जिन(जैन)-अहिंसा जस में भी हिंदी ॥079॥
परम-विवेक नस-नस में भी हिंदी ॥080॥
भारतेंदु सन्मति भी है हिंदी ॥081॥
काल-चक्र सद्गति भी है हिंदी ॥082॥
द्विवेदी की ‘सरस्वती’ भी हिंदी ॥083॥
जायसी मन पद्मावती भी हिंदी ॥084॥
प्रेम(प्रेमचन्द)से बढ़ प्रमाद भी है हिंदी ॥085॥
शंकर(जयशंकर)सम प्रसाद भी है हिंदी ॥086॥
मीरा , वर्मा , चौहान भी है हिंदी ॥087॥
अज्ञेय निराला शान भी है हिंदी ॥088॥
दिनकर गुप्त की जान भी है हिंदी ॥089॥
मैथिली, माखन मान भी है हिंदी ॥090॥
अब गूगल फेसबुक पर भी हिंदी ॥091॥
मेल व्हाट्सअप सब हिंदी - हिंदी ॥092॥
माउस की-बोर्ड कम्प्यूटर हिंदी ॥093॥
टैब, स्मार्ट और प्रिंटर हिन्दी ॥094॥
दृढ़ता अब जग उत्थान ले हिंदी ॥095॥
जी कर अब स्वाभिमान से हिंदी ॥096॥
अब तो मिटा अज्ञान ले हिंदी ॥097॥
तुम बिन सब सुनसान ए हिंदी ॥098॥
नव रचना कर सन्धान से हिंदी ॥099॥
ले जग में वरियता स्थान ए हिंदी ॥100॥
✍✍ *D Kumar--अजस्र(दुर्गेश मेघवाल )*
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