कवि का नाम - गोविन्द सिंह राव
राज्य - राजस्थान
कविता - क्या इसलिए मरता है सैनिक ?
मोबाईल नं. 9772663818
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कितने मासूम होते है सैनिक ,
मरते है अपने वतन पर,
सर कटवाते है, आंखें नुचवाते है,
गोली खाते है।
मां की गोद सूनी कर जाते है,
दे जाते है बहिन को गम के आंसू और,
और पत्नी को वियोग का श्वेत वस्त्र ।
पर किसलिए ?
क्या इसलिए कि -
भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ तक डूबे कुछ सफेदपोश लूट सके अपने देश को,
या इसलिए कि -
उच्च पदो पर आसीन वो अफसर ,
जो अपनी सौ पुश्तो को सुरक्षित कर जाते है।
या
या उन गुण्डो के लिए ,
जो कितनी सीताओं का हरण
और
द्रोपदीयों का चीरहरण करते है।
और छूट जाते है चंद कोडी़या उछाल कर न्याय के मुंह पर,
न्याय करने वालो के मुंह पर।
क्या इसलिए सैनिक मरता है सीमा पर ?
क्या इसलिए सैनिक मरता है सीमा पर कि-
आलीशान आश्रमों का मालिक ,
कोई बाबा अपनी ही बेटी ,
अपनी ही शिष्या के आंचल पर हाथ डाले,
और शान से किसी लाल बत्ती लगी गाड़ी मे घूमे।
क्या इसलिए ?
सिर्फ इसलिए मरता है सैनिक ?
काश !
काश कोई होता -
जो मरता उस तिरंगे मे लिपटे उस शव पर,
मां की लोरी पर,
बहन की राखी पर,
या
या अपाहिज बाप की लाठी पर।
काश..............................
रचयिता -गोविन्द सिंह राव
धुम्बडिया,जालोर
राजस्थान
9772663818
Beautiful
ReplyDeleteSandar Bhai sab
ReplyDeleteआभार
DeleteSandar Bhai sab Kya bat he
ReplyDeleteआभार
Deleteआभार
DeleteSuperb poem sir
ReplyDeleteआभार
DeleteSuperb and excellent poem sir
ReplyDeleteआभार
Deleteगजब, वर्तमान परिस्थिति का सही व्यंग्य
ReplyDeleteआभार
Deleteमार्मिक, बहुत ही संजीदा
ReplyDeleteआभार
DeleteAruna
ReplyDeleteAabhar
ReplyDeleteबहुत सटीक चित्रण किया गया हैं
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