Monday, September 16, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि गजेन्द्र हरिहारनो  दीप की रचना- संकीर्ण होता इन्सान

कवि  गजेन्द्र हरिहारनो  दीप
शीर्षक  संकीर्ण होता इन्सान
संपर्क  8962239082                
          8962668826
स्थान   डोंगरगांव 
          छत्तीसगढ़

ज्ञान  को
विज्ञान से जोड़कर
संस्कारों  से
मुँह अपना मोड़कर
विलासिता के सामान जुटाकर
ऐशोआराम की ज़िंदगी
जीना ही
अपना मक़सद बना
चल पड़ा है इन्सान
एक ऐसी डगर पर
जहाँ मची है भगदड़
लगी हुई है होड़
एक दूसरे से
आगे  निकल जाने को
  सभ्य कहलाने को
   अब
  न तो मिलते हैं
जगन ज़फ़र जॉन जोगिन्दर
न ही होता है
बधाईयों का आदान प्रदान
नही लगाता
कोई किसी के
घावों पर मरहम
कितना
  संकीर्ण होता जा रहा है
  इन्सान ........
  : :  : 
   गजेन्द्र हरिहारनो दीप
   डोंगरगांव
छत्तीसगढ़

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