नाम _ संतोष श्रीवास्तव सम
ऱाज्य_ छत्तीसगढ
शीर्षक _. न हो युद्ध
मोबाइल _९९९३८१९४२९
शीर्षक _ न हो युद्ध
देखा है मैने युद्धो मे,
कैसी बर्बादी होती है,
न हो युद्ध कि इससे,
मानवता सारी खोती है।
सारी मर्यादा छोड़ के,
जब बम बरसाये जाते है,
लाखों जानों को लेते है,
इतिहास बनाये जाते है।
ऐसा भी क्या जुल्म कि,
जान की कीमत न होती है,
मानवता सारी खोती है।
जो नगर शहर बसते है,
वे तहस नहस हो जाते है,
हर एक विकास जो थे हुए,
पल भर में मिट जाते है,
कहां युद्ध फिर भाता है,
हर एक को रूलाता है।
जीवन जो दिया प़भु ने,
युद्घ उसे भटकाती है,
मानवता सारी खोती है।
__संतोष श्रीवास्तव सम
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