Wednesday, September 4, 2019

उत्तराखंड रूद्रप्रयाग से कवि कालिका प्रसाद सेमवाल की कविता- मां

कवि का नाम  कालिका प्रसाद सेमवाल
शीर्षक  मां
राज्य उत्तराखंड रूद्रप्रयाग
सम्पर्क 8171208350

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       मां
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मां परिवार की आत्मा होती है
मां घर की आरती होती है,
मां घर की लक्ष्मी  होती है,
मां तो घर की भगवान  होती है।

मां गंगा सी  पावन हैं ,
मां तीर्थ राज प्रयाग है
मां ऋतुराज वसंत है,
मां ममता का प्याला है।

मां तपती धूप में साया है,
मां आदिशक्ति महामाया है,
मां जीवन में प्रकाश है
मां ही जीवन की आस है।

मां अंधेरे में उजाला है,
मां ईद , दिवाली, होली है,
मां फलों में श्रीफल है,
मां काली है, सरस्वती है।

मां इस धरा पर हमें लायी है,
मां की याद हमें अति आईं है,
मां तुम मेरे रग रग में हो,
मां तुमसे ही मैं ने यह काया पायी है।

मां गर्मियों में ठंडी छांव होती है
मां सर्दियों में गुनगुनी धूप होती है
मां वर्षा ऋतु में हल्की फुहार है
मां जीवन की परिभाषा है

मां का ह्रदय विशाल होता है
मां परिवार की धुरी होती है
मां ममता की मूरत होती है
मां ईश्वर की प्रतिनिधि होती है
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कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
246171
मोबाइल 9410782566

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