Monday, September 23, 2019

महाराष्ट्रा से कवि संजय जैन की रचना- क्यो छोड़ दिया साथ

नाम : संजय जैन(मुम्बई)
राज्य: महाराष्ट्रा
मो.9987699021
शीर्षक *क्यो छोड़ दिया साथ*
विधा : गीत

कितना लूटोगे तुम अपना बनकर।
कितना और सताओगे
अपना बनकर।
कभी तो तुमको शर्म आयेगी वे गैरत इंसान।
या काटोगे उसी डाली को
जिस पर बैठा करते थे कभी तुम।।

सफलता तुमको मिल है, बहुत खुशी की ये बात है।
परन्तु अपनी सफलता में
तुम इतना मत इतराओ।
की जिन्होंने तुम्हे पहुंचाया है शिखर पर।
कही वो ही तुम्हारे पतन का कारण न बन जाये।।

इसलिए संजय कहता है
एक सही बात।
बनाकर तुम चलो सदा अपनो के साथ।
नही तो छोड़ देंगे तुम्हे
तुम्हारे ही अपने लोग।
फिर तुझे एहसास होगा
की क्या खोया क्या पाया है।।

सफलता की चकाचौन्ध  में, तुझे हो गया था घमंड।
अब आ गया वही जहां से
तू उठता था कभी।
तुझे अपने असलियत अब पता चल गया।
क्योकि छोड़ दिया तेरा साथ अपनो ने ही।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)
23/092018

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