Monday, September 23, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री रश्मि अग्निहोत्री की रचना - हिंद की नारी

कवयित्री - रश्मिअग्निहोत्री
शीर्षक -हिंद की नारी
राज्य  - छत्तीसगढ़
सम्पर्क -  
          *हिंद की नारी*
तुम हिंद की नारी हो
हजारों पर भी भारी हो
न उदासियों में घिरना कभी
  चाहे गम की  घटा कारी हो ।
तुम हिंद की नारी हो
हजारों पर भी भारी हो।।
तुमने रचा इतिहास सारा
तुमसे तो पौरूष हारा
तुम भूल न जाना खुद को,
चाहे छाई गम की अंधयारी हो।
तुम हिंद की नारी हो
हजारों पर भी भारी हो।।
कल बदल देना ।
आज बदल देना ,
शोषकों का राज बदल देना।
फूल की कोमलता समेटे
तुम ही कांटों की क्यारी हो।
तुम हिंद की नारी हो
हजारों पर भी भारी हो‌
ना उदासियों में घिरना कभी
चाहे गम की घटा कारी हो।।
तुम हिंद की नारी हो
तुम हिंद की नारी हो।
# रश्मिअग्निहोत्री
    जिला - कोंडागांव

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