Wednesday, September 18, 2019

राजस्थान से कवि बाबू लाल शर्मा, बौहरा की कविता- हिन्दी

कवि...       ...  बाबू लाल शर्मा, बौहरा
शीर्षक...      ...  हिन्दी
राज्य.....        राजस्थान
मो.नं.   .....      9782924479
✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨
~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
.                      *हिन्दी भाषा*
.                   (कुण्डलिया छंद)
.                  ✨✨१✨✨
हिन्दी  हिन्दुस्तान  की, भाषा  मात  समान।
देवनागरी लिपि लिखें, सत साहित्य सुजान।
सत साहित्य सुजान,सभी की है अभिलाषा।
मातृभाष   सम्मान , हमारी  अपनी   भाषा।
सजे भाल पर *लाल*, भारती  माँ  के बिन्दी।
भारत  देश  महान, बने   जनभाषा   हिन्दी।
.                 ✨✨२✨✨
भाषा संस्कृत  मात से, हिन्दी शब्द प्रकाश।
जन्म हस्तिनापुर हुआ, फैला  खूब प्रभास।
फैला  खूब   प्रभास,  उत्तरी   भारत   सारे।
तद्भव  तत्सम  शब्द, बने   नवशब्द  हमारे।
कहे लाल कविराय,तभी से जन अभिलाषा।
देवनागरी    मान,  बसे   मन  हिन्दी  भाषा।
.                 ✨✨३✨✨
भाषा शब्दों का बना, बृहद  कोष  अनमोल।
छंद व्याकरण के बने,व्यापक नियम सतोल।
व्यापक नियम सतोल,सही उच्चारण मिलते।
लिखें पढ़ें अरु बोल, बने अक्षर ज्यों खिलते।
कहे *लाल* कविराय, मिलेगी सच  परिभाषा।
हर   भाषा   से   श्रेष्ठ, हमारी  हिन्दी  भाषा।
.                 ✨✨४✨✨
भारत भू  भाषा भली, हिन्दी  हिंद हमेश।
सुंदर लिपि से सज रहे,गाँव नगर परिवेश।
गाँव नगर परिवेश, निजी हो या  सरकारी।
हिन्दी हित  हर कर्म, राग अपनी  दरबारी।
कहे *लाल*  कविराय, विरोधी  होंगें गारत।
कर हिन्दी का मान, श्रेष्ठ तब होगा भारत।
.                 ✨✨६✨✨
हिन्दी  सारे  देश  की,  एकीकृत  अरमान।
प्रादेशिक  भाषा  भले, प्रादेशिक  पहचान।
प्रादेशिक पहचान,सभ्यता संस्कृति वाहक।
उनका अपना मान, विवादी  बकते  नाहक।
शर्मा  बाबू  *लाल* , सजे  गहनों  पर बिन्दी।
प्रादेशिक  हर  भाष, देश की  भाषा हिन्दी।
.                 ✨✨७✨✨
वाणी देवोंं की कहें,संस्कृत संस्कृति शान।
तासु सुता हिन्दी अमित, भाषा हिंदुस्तान।
भाषा  हिंदुस्तान, वर्ण  स्वर  व्यंजन प्यारे।
छंद मात्रिका ज्ञान, राग रस लय भी न्यारे।
गयेे शरण में *लाल*, मातु पद वीणा पाणी।
रचे अनेकों ग्रंथ, मुखर कवियों की वाणी।
.              ✨✨🌞✨✨
✍©
*बाबू लाल शर्मा, बौहरा*
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान
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