Wednesday, September 18, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- जागरण

नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक जागरण
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़

कविता जागरण

बहुत सो लिए अब तो जागरण होना है ।

             नहीं जागे अबकी बार तो , फिर चौरासी में आना है ।

   जीसे समझ बैठे हो
अपना ,ये तो पल दो पल
का ठिकाना है ।

   देखो जरा ध्यान से ,जो तुम जीवन भर करते जाते हो ।

   जोड़ते हो धन ,पद सम्मान , और रिश्ते नाते
फिर भी खाली हाथ ही जाते हो ।

   हर पल जागरण की बेला  है । नन्हे कोमल पंख
है तेरे चलना तुझे अकेला है ।

     जाग जा मुसाफिर मंजिल बहुत दूर है ।
शांति नहीं मिलेगी ये झुठे संसार में , जागरण ही तो
जिन्दगी है, आत्मा बड़ी मजबुर है ।

     देख आसमान में लालीमा छा रही है ।
पक्षी भी निड़ छोड़ जा रही
है ।।

     मानवतन तो एक मौका है जाग जाने के लिए
कर्म बंधन तोड़ उस पार जाने के लिए ।।

देख जागकर मस्जिद में अज़ान हो रहा है ।
गुरु द्वारे में गुरुवाणी
मंदिरों में भोर प्रार्थना हो
रहा है ।।
लिए जन्मों जन्मों की तमस को तू क्यों पगले सो
रहां है ।।

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया बोस जी ,बधाई

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...