कवयित्री -सावित्री मिश्रा
सम्पर्क -
शीर्षक -हम अलग ना होंगे राधे
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शीर्षक -हम अलग ना होंगे राधे
राज्य-ओडिशा ,झारसुगुड़ा
हम अलग ना होंगे राधे
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मन के तार तुझी से बँधे।
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे।
वेणु बजाता वंशी तट पर,
फिरता हुँ नित यमुना तट पर,
तुझे देखता हुँ यमुना तट पर,
नयन खौल कर आधे -आधे।
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे ।
फिर -फिर वृंदावन में आके,
रंग देता हुँ तिरछे बाँके।
प्रिये हमारी प्रेमकथा के,
पृष्ठ जो रह गए थे आधे।
जीवन के अन्तिम पल तक ,
हम अलग ना होंगे राधे।
साज भिन्न हो समय समय का,
राग ना छूट सका नव वय का।
सुर अब भी है वही हृदय का,
लाख जोग जाप जो साधे ।9
जीवन के अन्तिम पल तक ,
हम कभी अलग ना होंगे राधे ।
मन के तार तुझी से हैं बंधे,
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे।
हम अलग ना होंगे राधे
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मन के तार तुझी से बँधे।
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे।
वेणु बजाता वंशी तट पर,
फिरता हुँ नित यमुना तट पर,
तुझे देखता हुँ यमुना तट पर,
नयन खौल कर आधे -आधे।
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे ।
फिर -फिर वृंदावन में आके,
रंग देता हुँ तिरछे बाँके।
प्रिये हमारी प्रेमकथा के,
पृष्ठ जो रह गए थे आधे।
जीवन के अन्तिम पल तक ,
हम अलग ना होंगे राधे।
साज भिन्न हो समय समय का,
राग ना छूट सका नव वय का।
सुर अब भी है वही हृदय का,
लाख जोग जाप जो साधे ।9
जीवन के अन्तिम पल तक ,
हम कभी अलग ना होंगे राधे ।
मन के तार तुझी से हैं बंधे,
जीवन के अन्तिम पल तक,
हम कभी अलग ना होंगे राधे।
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ओडिशा
झारसुगुड़ा ओडिशा
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