कवि-शंकर गोयल
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हिंदी दिवस पर विशेष।
हिंदी भाषा रूहानी है,
लगती सबको सुहानी है।
लोगों की जुबानी है ,
हिंदी की कहानी है।।
संस्कृत हैं देवभाषा,
हिंदी उसकी रानी है ।।
तत्सम, तद्भव, देशज का,
नहीं है यहां खेल।।
जो आया इसका हुआ,
करती सबसे मेल।।
संस्कृत, अरबी, फारसी ,
हो इंग्लिश या डच।।
सुनने वालों के दिलों को,
करती सदैव टच ।
राजनीति के चक्रव्यूह मे,
फस गयी हिंदी भाषा।।
चक्रव्यू टूटेगा अभिमन्यु से नहीं,
अर्जुन की है आशा।।
हिंदी हिंदी भाषा है,
जन जन की है शान।।
हिंदी गीता भाष्य है,
भारत का सम्मान।।
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