Monday, September 16, 2019

राजस्थान से कवि पवन गौतम बृज राही बमूलिया की रचना ग़ज़ल

रचनाकार का नाम--
पवन गौतम बृज राही बमूलिया
राज्य--राजस्थान
सम्पर्क--9116488506
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रचना--ग़ज़ल
विषय/शीर्षक
स्वार्थ का संसार बदलते देखा है...
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हमने अक़्सर प्यार बदलते देखा है !
स्वार्थ का संसार बदलते देखा है  !

गुम है गीत चुटकुले गूँजे मंचो पर,
ताली से फ़नकार बदलते देखा है !

रक़म काफ़िया शे'र रदीफ़ ओ मिसरे,
ग़ज़ल रूप आकार बदलते देखा है !

देख अजब दिल्ली गद्दी की रक्त कथा,
बार बार दरबार बदलते देखा है !

माँ बहिना बेटी और संगी साथी बन,,
नारी को किरदार बदलते देखा है !

कौन कहाँ कब  बदले कैसे पता नहीं?
सुबह हुई अख़बार बदलते देखा है !

सरहद पर भी अरे सियासत रूके नहीं
चुपके से तलवार बदलते देखा है !

पवन बता ये सच्ची सच्ची कलियुग में
मतलब से सत्कार बदलते देखा है।
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रचनाकार  -  पवन गौतम
            बृजराही बमूलिया (राजस्थान)

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