कवि का नाम - परमानंद निषाद
शीर्षक - बेटी
राज्य - छत्तीसगढ,जिला-बलौदा बाजार
मोबाइल- 7974389033
बेटी
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मां की अंखियां सुनी रह जाती
बेटियां दो जहां में बांटी जाती,
मां के मुख पर उदासी रह जाती,
जब पायल की छन्कार ना हो पाती।।
अचानक घर में एक लहर आ जाती,
बेटी के आने की समाचार जब वो पाती,
फिर एक मायूसी छा जाती,
बेटी कष्ट में है और कारण दहेज बतलाती।।
बात समाज कि जब आती,
मां की ममता सीमठ रह जाती,
पीड़ा बेटी की सही ना जाती,
बेटी की चिंता बहुत सताती।।
ममता "चामुंडा"" रूप में आती
बेटी का कटा शव जब वो पाती,
इंसाफ बेटी को दिला ना पाती,
चक्कर कोर्ट का वो पाती।।
वो चामुंडा रूप पूछना चाहती,
बेटी को मारने वाले क्या
"मर्द के कोख" से आते,
बेटी को मारने वाले चुप रह जाते,
जब सृष्टि के निर्माता बेटी को लोग बतलाते।।
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