Friday, September 27, 2019

राजस्थान से कवि बाबू लाल शर्मा, बौहरा की रचना नारी

कवि.....  बाबू लाल शर्मा, बौहरा
शीर्षक....     नारी
राज्य....  राजस्थान
मो.नं.  .....  9782924479

~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
.          *चौपाई छंद*
.                 *नारी*
.          
नारी  रत्न  अमूल्य  धरा पर।
ईश्वर रूप  सकल सचराचर।।
राम  कृष्ण   जन्माने   वाली।
सृष्टि धर्म की सत प्रतिपाली।।१
.      
बेटी बहिन  मात अरु  दारा।
हर प्रतिरूप मनुज उद्धारा।।
नारी जग परहित तन धारी।
सुख दुख पीड़ा सहे दुधारी।।२
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द्वय घर  की सब जिम्मेदारी।
बिटिया वहन करे वह सारी।।
पढ़ी लिखी  जब होती नारी।
दो  दो  घर  बनते  संस्कारी।।३
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शान  मान  अरमान हमारी।
सुता बहिन पत्नी माँ नारी।।
त्याग  मान  मर्यादा   मूरत।
हर नारी  के  झलके सूरत।।४
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शक्ति  प्रदाता  होती  नारी।
बल पौरुष सर्वस  दातारी।।
देश धरा  अरु धर्म बचाती।
नारी  हर  कर्तव्य निभाती।।५
.       
सृष्टि   चक्र   संबल  महतारी।
विधि ने  रची  धरा सम नारी।।
आदि शक्ति से  मनु तन धारी।
रचे प्रथम नर अरु विधि नारी।।६
.        
नारी  है   हर  नर  की  माता।
मानव  तन  की जीवन दाता।।
देव शक्ति बहु महापुरुष जन।
सृजित  किए  नारी ने जीवन।।७
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जीव  जगत में है बहु प्राणी।
नारी  है  जग  में  कल्याणी।।
धीर धरा सम  तन तपशीला।
नारी तन अनुपम प्रभु लीला।।८
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मनुज अंश  धारे निज  तन  में।
निज जीवन भय करे न मन में।।
उदर भार  सहती   नौ   महिने।
पीड़ा  प्रसव अपरिमित सहने।।९
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नहीं  धरा पर  अस तन त्यागी।
नारि शक्ति जग हित बड़भागी।।
शिशु का  पालन  बहु कठिनाई।
सहज   निभाए   यथा  मिताई।।१०
.       
सबला  बन  कर  रहना नारी।
तव तन शक्ति छिपी है भारी।।
नर नारी  द्वय  रथ  के पहिये।
कर सम्मान  सुखी नर रहिये।।११
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✍©
बाब लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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