Monday, September 30, 2019

महेश गुप्ता जौनपुरी की रचना- गरीबी का दर्द

कवि - महेश गुप्ता जौनपुरी
शिर्षक - गरीबी का दर्द
मोबाइल-9918845864

क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरी
सुख गया है आंखों के पानी
रिमझिम बारिश की फुहार में
समेट रखा है आंचल में
गरीब तेरी कहानी को
उपहास बनायेगी ये दुनिया
तू कल भी फुटपाथ पर था
आज भी तेरी यही कहानी है
गरीब था तू गरीब रहेगा
वंचित तू अपने तकदीर से रहेगा
सुन गरीब लगा लें जोर
अपना अस्तित्व बचा ले अब
अब ना कोई कर्ण लेगा जन्म
अब ना कृष्ण का मिलेगा वरदान
तेरी करनी तु ही जाने
मैं तो मतवाला आगे बढ़ा
तरस आयेगी भी तो
कैद कैमरे में कर लुंगा
तेरे दुख दर्द से
मैं पर्दा यूं ही कर लुंगा
आगे आगे बहुत आगे
मैं बढ़ते बढ़ते बढ़ जाऊंगा
तेरा कर्म तु जाने
गरीबी में जियो या मर जाओ
कड़ी धुप बारिश गर्मी ठण्डी
सब परीक्षा लेंगे तेरी
कभी फटेहाल चादर ओढ़े
कभी रफू किये कपड़े पहन लेना
उपहास उड़ाती रहेंगी दुनिया
गरीबी में तुम जीना सीख लेना

      महेश गुप्ता जौनपुरी

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