प्रेषक-हरिहर मिश्र
नयापारा खुर्द,पिथौरा,
जिला महासमुंद,छ. ग. संपर्क-9926274457.
"आरक्षण"
आरक्षण अभिशाप बना,
आस्तीन का सांप बना,
जाति-पांति में देश बांट कर;
दुश्मन का भी बाप बना।
'वंचित-जन को अवसर देना-'
ध्येय बहुत यह पावन था,
अवसरवादी तत्वों ने फिर;
दिया इसे एक पाप बना।
अवधि बढ़ा कर-ढोल पीट कर,
सत्तर वर्षों राज किया;
देश पिछड़ता रहा सतत,
यह मानस का संताप बना।
सत्य छुपाया वामपंथ ने,
मिथ्या से पथभ्रष्ट किया;
बिकती-मिटती रही योग्यता,
देश 'मूर्ख' चुपचाप बना।
लाभ लिया पीढ़ी-दर-पीढ़ी,
गिने चुने कुछ लोगों ने ,
हकदारों को मिला नहीं यह-
-केवल व्यर्थ प्रलाप बना।
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Monday, September 16, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि हरिहर मिश्र की रचना- आरक्षण
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