कुसुम शर्मा अंतरा
विधा----ग़ज़ल
जम्मू कश्मीर
विधा----ग़ज़ल
जम्मू कश्मीर
ग़ज़ल
हुआ दर्द भी बेअसर धीरे-धीरे
यूँहीं कट चला अब सफ़र धीरे -धीरे
यूँहीं कट चला अब सफ़र धीरे -धीरे
घिरा कुछ अँधेरा अज़ब क़ातिलाना
मग़र लौट आई सहर धीरे-धीरे
मग़र लौट आई सहर धीरे-धीरे
लड़े उनकी ख़ातिर थे किस-किस से हम भी
ये उनको भी होगी ख़बर धीरे-धीरे
ये उनको भी होगी ख़बर धीरे-धीरे
ज़रा हौसलों का पकड़ लेना दामन
उतर जाएगी हर नज़र धीरे-धीरे
उतर जाएगी हर नज़र धीरे-धीरे
शिकस्तों में भी इक अज़ब मयकशी थी
हुए ग़म से हम बेख़बर धीरे-धीरे
हुए ग़म से हम बेख़बर धीरे-धीरे
हैं खुशियों के लम्हे भले दूर अब भी
चले जायेंगे लौटकर धीरे-धीरे
चले जायेंगे लौटकर धीरे-धीरे
न मायूस होना कभी अंतरा तुम
मिलें तुमको धोखे अगर धीरे-धीरे
मिलें तुमको धोखे अगर धीरे-धीरे
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
जम्मू कश्मीर
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