कवयित्री का नाम:-रीतु देवी
शीर्षक:-न रहे दुर्भावना
राज्य:-बिहार
जिला:-दरभंगा
संपर्क संख्या:-
कविता:-
न रहे दुर्भावना
दिल में न रहे दुर्भावना,
हो सबकी नजरों तरन्नुम की भावना।
अश्क बहती रहती अनवरत,
मोहब्बत की शिखर न चढा सकती ऐसी लत।
हम हैं सभी अनछुए, अदृश्य के संतान
शीश झुका हम करें सबका सम्मान।
पहिए हैं अनेक , रेलगाड़ी की
छुकछुक कर चलती , बिना दुर्भावना मंजिल सुलभ करती राहगीर की
दुर्भावना न पले कभी किसी कोने तन,मन के
रहे उर गठबंधन में रहकर नमन करके
रीतु देवी
दरभंगा, बिहार
हो सबकी नजरों तरन्नुम की भावना।
अश्क बहती रहती अनवरत,
मोहब्बत की शिखर न चढा सकती ऐसी लत।
हम हैं सभी अनछुए, अदृश्य के संतान
शीश झुका हम करें सबका सम्मान।
पहिए हैं अनेक , रेलगाड़ी की
छुकछुक कर चलती , बिना दुर्भावना मंजिल सुलभ करती राहगीर की
दुर्भावना न पले कभी किसी कोने तन,मन के
रहे उर गठबंधन में रहकर नमन करके
रीतु देवी
दरभंगा, बिहार
बहुत सुन्दर सृजन
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