कवि का नाम- इन्दु कुमारी
राज्य - बिहार
विधा कविता
शीर्षक " ख्वाब"
राज्य - बिहार
विधा कविता
शीर्षक " ख्वाब"
बेबश निगाहों में यूं उमिदें लहराई है।
कचरे से जिंदगी के ख्वाब बुन लाई हैं।
मां के विश्वास में बेटी मुस्काई है।।
बिखरे जिवन को तुझे ही सजाना है।
बेटी तुझे बेटे से भी बढ़कर दिखाना है।
जो ख्वाब है, हकीकत कर जाना है।
कचरे से जिंदगी के ख्वाब बुन लाई हैं।
मां के विश्वास में बेटी मुस्काई है।।
बिखरे जिवन को तुझे ही सजाना है।
बेटी तुझे बेटे से भी बढ़कर दिखाना है।
जो ख्वाब है, हकीकत कर जाना है।
खुशियों ने आज भले ही मुंह मोड़ा है।
पर उम्मीदों ने दामन नहीं छोड़ा है।
बेटी तू आसमां में उड़ जाने का
मेरे ख्वाबो का सुंदर सतरंगी घोड़ा है।
तेरी आंखों में जिंदगी यूं नजर आई है।
कानुन की आज फटी टोपी पहनाई है।
देख जरा तेरे चेहरे पर जो खुशी आई है।
तेरी हंसी में ही मेने सारी खुशियां पाई है।
इन्दु कुमारी
शिक्षिका
पर उम्मीदों ने दामन नहीं छोड़ा है।
बेटी तू आसमां में उड़ जाने का
मेरे ख्वाबो का सुंदर सतरंगी घोड़ा है।
तेरी आंखों में जिंदगी यूं नजर आई है।
कानुन की आज फटी टोपी पहनाई है।
देख जरा तेरे चेहरे पर जो खुशी आई है।
तेरी हंसी में ही मेने सारी खुशियां पाई है।
इन्दु कुमारी
शिक्षिका
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