Monday, September 9, 2019

बिहार से कवयित्री रीतु देवी की रचना- नवसृजन करो

मेरी कविता, मेरा ट्रेंड
कवयित्री का नाम:-रीतु देवी
शीर्षक:-नवसृजन करो
राज्य:-बिहार
जिला:-दरभंगा
संपर्क संख्या-
कविता:-
नवसृजन करो
************
परिश्रम करो, तुम परिश्रम करो
आलस्य की देवी त्याग तुम
    नवसृजन करो।
पुकार रही है तुम्हें भारतमाता की सौगंध,
दिखा दो करके कोई नया अनुबंध,
तुम्ही हो भारतमाता के सच्चे लाल,
कर दो परिश्रम से पावन धरती को निहाल।
परिश्रम करो तुम नवसृजन करो
भारतमाता की इस मिट्टी से करो तिलक,
दिखती जहाँ खेतों में सोने-चाँदी की चमक।
परिश्रम करो तुम नवसृजन करो
भारतमाता की इस पावन मिट्टी पर ,
पल बढकर शिक्षित होकर,
लहरा दो तिरंगा विश्व  के आसमाँ में
खुशियों के फूल खिले हर आँगन में
परिश्रम करो तुम परिश्रम करो।
परिश्रम करो तुम नवसृजन करो।।
               रीतु देवी
         दरभंगा, बिहार
स्वरचित एवं मौलिक

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...