कवि- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
शीर्षक- संस्कार
संपर्क-9434758093
राज्य -पश्चिम बंगाल
अब मम्मियाँ जिन्स पहनती हैं
आँचल की छांव कैसे मिले
कैसे मिले भाई कैसे मिले
लबों की लाली चमकती रहे
मुन्ना पप्पी को तरसता रहे
माँ का दूध रहे कसा-कसा
बच्चे बोतल पीते रहें
पीते रहें भाई पीते रहें
काजल बिंदिया टीका चंदन
बंद हो गया लोरी स्पंदन
प्यार का एहसास कैसे मिले
कैसे मिले भाई कैसे मिले
डिस्को डांस चलता रहे
पश्चिमी संगीत बजता रहे
बच्चे लोरी को तरसते रहें
तरसते रहें भाई तरसते रहें
लोककथा और परीकथा
इस मम्मी को याद कहाँ
मम्मी डैडी के कारनामे
बच्चों को सुनाये जाते हैं
दादी नानी दूर रहें
बच्चे उनसे कैसे मिले
कैसे मिले भाई कैसे मिले
भाषा-बोली रहन-सहन
बदल गया जीने का ढंग
ब्रत- त्यौहार और पूजा-पाठ
अब लगता है बेकार
भूल गई वो सब शिष्टाचार
रस्मों-रिवाज और रिश्ते-नाते
बच्चों को संस्कार कैसे मिले
कैसे मिले भाई कैसे मिले
अब ममियाँ जिन्स पहनती हैं
आँचल की छांव कैसे मिले
कैसे मिले भाई------------
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
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