नाम --- ----जितेश्वरी साहू
शीर्षक----" दिल की जमीं "
सम्पर्क नं. ----
राज्य ------- छत्तीसगढ़
शीर्षक----" दिल की जमीं "
सम्पर्क नं. ----
राज्य ------- छत्तीसगढ़
कविता -----
देखा है मैंने दिल की जमीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल की......
............
कहनी थी तुझसे बातें कई
ढूंढा था मैंने जब भी कभी
तु जो कही भी मिला ही नहीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने..........
.........
अक्सर ख़यालों में आते हो तुम
नींदें भी मेरी चुराते हो तुम
सदियों से मैं तो सोई नहीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल.........
..........
पल दो पल की मांगी खुशी
अंधेरों में जब भी पलटी कभी
महफ़िल नहीं तन्हाई मिली
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल की जमीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही ।
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल की......
............
कहनी थी तुझसे बातें कई
ढूंढा था मैंने जब भी कभी
तु जो कही भी मिला ही नहीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने..........
.........
अक्सर ख़यालों में आते हो तुम
नींदें भी मेरी चुराते हो तुम
सदियों से मैं तो सोई नहीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल.........
..........
पल दो पल की मांगी खुशी
अंधेरों में जब भी पलटी कभी
महफ़िल नहीं तन्हाई मिली
नहीं है नहीं है नहीं तु कही
देखा है मैंने दिल की जमीं
नहीं है नहीं है नहीं तु कही ।
जितेश्वरी साहू सचेता
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