Monday, September 9, 2019

छत्तीसगढ,जिला-बलौदा बाजार से कवि परमानंद  निषाद की प्रकाशित रचना नारी का संघर्ष

कवि का नाम - परमानंद  निषाद
शीर्षक- नारी का संघर्ष
राज्य - छत्तीसगढ,जिला-बलौदा बाजार
मोबाइल- 7974389033

        नारी का संघर्ष
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जब जब नारी का अपमान हुआ है,
तब तब घमासान हुआ है,

देखो अंतिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते है,
आकर के पापा इनको क्यों नही धमकाते है,

सबसे संघर्ष करके भी,कुछ करने को सोचती है,
अपने ही लोगों द्वारा रोक दिया जाता है,

सपनों का कोई आज महल तोड़ चला है,
जीवन में जो आया था मुख मोड़ चला है,

अपराध हुआ है महिला पर,
उसे जात-धर्म मे बांट रहे,
कुछ चालाक पाखंडी अपने ही,
समाज की जड़ो को काट रहे,

नारी है इक त्याग की मूरत,
ममता और है प्यार की पूरक,

फिर भी कुछ कमी रह जाये तो,
सबकी बातें सुनने वाली,मैं वही नारी,

मां,बेटी,बहन,पत्नी हर रिश्ता है उससे,
सोच एक नारी में खूबियां कितनी सारी है,

ऐ नारी तू खुद की पहचान बन,
शक्ति का अस्तित्व तू,दुर्गा का अभिमान बन,

अबला नही नारी शक्ति का केन्द्र है,
आफत में दुर्गा बन हुंकारती है औरत,

तुमने ही दिया नारी को नाम,
हे मां तुझे मेरा प्रणाम ।

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