कवि का नाम - बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - राजस्थान
शीर्षक - - तो ले चलूँ।
सजल जीवन में संग धार बनकर बहे,
तो ले चलूँ।
जीवन समरांगण में असिधार बनकर बहे,
तो ले चलूँ।
निराश अंधियाली रात में दीप बनकर जले,
तो ले चलूँ।
मैं तुम पर छंद लिखूँ तू लय बनकर मिले,
तो ले चलूँ।
मेरे जीवन की हर उलझन, कर्तव्य पथ की भटकन,
भावी विपदा की सिहरन, हाथ में लेकर हाथ चले,
तो ले चलूँ।
जब हो राह रुकी सी, जीवन संध्या थकी सी,
उस राह की अंतिम वेला में, गलहार बनकर रहे,
तो ले चलूँ।
आसन्न मृत्यु काल से, सावित्री बनकर लड़े,
तो ले चलूँ।
तो ले चलूँ।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
खंडेला जिला सीकर राजस्थान।
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