कवियत्री- रश्मिअग्निहोत्री
विषय- अन्नदाता
राज्य छत्तीसगढ़
संपर्क-
# अन्नदाता #
विषय- अन्नदाता
राज्य छत्तीसगढ़
संपर्क-
# अन्नदाता #
चीरकर धरती का सीना
बहाकर ख़ून पसीना
अनवरत हल थामें
जो खड़ा है देखो !
जाड़ा, पाला धूप में
जो अड़ा है देखों!
कीचड़ भरी मेड़ों पर
वो हमारा अन्नदाता है.....
खेलकर खेती का जुआ
बांधकर पेट जो बड़ा हुआ
कर्ज में डूबा जिसका रूआ
नहीं उठता कभी -कभी
घर जिसके देखों धुआं
जो एक पहर खाता
वो हमारा अन्नदाता हैं.....
कभी वह अर्द्ध वस्त्र हैं
कभी ब्याज देकर त्रस्त है
कभी बाढ़ कभी पाला
कभी भूख पर ताला
" रश्मि " जिसके हक हैं
वो हमारा अन्नदाता हैं
वो हमारा अन्नदाता हैं।।
बहाकर ख़ून पसीना
अनवरत हल थामें
जो खड़ा है देखो !
जाड़ा, पाला धूप में
जो अड़ा है देखों!
कीचड़ भरी मेड़ों पर
वो हमारा अन्नदाता है.....
खेलकर खेती का जुआ
बांधकर पेट जो बड़ा हुआ
कर्ज में डूबा जिसका रूआ
नहीं उठता कभी -कभी
घर जिसके देखों धुआं
जो एक पहर खाता
वो हमारा अन्नदाता हैं.....
कभी वह अर्द्ध वस्त्र हैं
कभी ब्याज देकर त्रस्त है
कभी बाढ़ कभी पाला
कभी भूख पर ताला
" रश्मि " जिसके हक हैं
वो हमारा अन्नदाता हैं
वो हमारा अन्नदाता हैं।।
# रश्मि अग्निहोत्री
बहुत अच्छी रचना की बधाई
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