कवि-धनंजय सिते(राही)
जिला-छिन्दवाड़ा(म.प्र.)
सम्पर्क-9893415829
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श्री गणेश पधारे-द्वार हमारे
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तिथी चतुर्थी भादो मास
संग मुशक ले पधारे घर!
बिगड़ी सबकी बनाते है
प्रथम पुज्य ये लंबोदर!!
२
प्रथम पुजा का मान आपको
बुद्धी के आप ही दाता हो!
रोते रोते जो आए दर पर
वह हसते हसते जाता हो!!
३
शमीपत्र है आपको प्यारा
भोग आपका मोदक है!
भक्तो के सदा सहायक हो
और दुष्टो के अवरोधक है!!
४
जब जब भी है आप पधारे
सारे संकट दुर हो जाते है!
करोड़ो सेवक आप दर पे
अपने शिश झुकाने आते है!!
५
दस दिन का निवास आपका
हमको कम कम लगता है!
पुरे साल के त्योहार से जादा
दस दिन दम दम लगता है!!
६
सारे जगत के विघ्नहर्ता तुम
सारे दु:खो के दुखहर्ता हो!
ज्ञान बुद्धी के दाता हो तुम
संसार के तुम सुखकर्ता हो!!
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कवि-धनंजय सिते(राही)
Monday, September 2, 2019
छिन्दवाड़ा(म.प्र.) से कवि धनंजय सिते(राही) की कविता- श्री गणेश पधारे-द्वार हमारे
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