०१. कवि का नाम- गार्गी सिंह
०२. शीर्षक- चैन-ओ-अम्न
०३. राज्य- महाराष्ट्र
०४. सम्पर्क नं.-
०२. शीर्षक- चैन-ओ-अम्न
०३. राज्य- महाराष्ट्र
०४. सम्पर्क नं.-
चाँद-सितारों से सजी एक रात थी
दूर कहीं, एक दुनिया आबाद थी...
यहाँ एक पूरी बस्ती वीरान थी
शायद ज़िन्दगी कुछ नाराज़ थी...
बन्दूक की गोलियों की आवाज़ थी
किसी सिपाही की बिछी लाश थी...
वो तिरंगे में लिपटी घर आई थी
कुछ चीथड़े थे, कुछ बची राख थी...
उस माँ की सिसकी बेआवाज़ थी
जिसकी बहू की सूनी माँग थी...
बूढ़े बाप की तबीयत नासाज़ थी
आँखों में उसे ज़िंदा देखने की आस थी...
कहीं वतन परस्ती के जलवे थे
तो कहीं डबडबाई हर आँख थी...
दहशतगर्दी के घटिया खेल में,
जाने किसकी जीत, किस की मात थी...
इंसानियत से बड़ी मज़हब की ज़ात थी
ज़िंदगी से सस्ती मौत की सौगात थी!
ऐ काश! उस दुनिया में ले चल..
जहाँ कभी चैन-ओ-अम्न की बात थी!
दूर कहीं, एक दुनिया आबाद थी...
यहाँ एक पूरी बस्ती वीरान थी
शायद ज़िन्दगी कुछ नाराज़ थी...
बन्दूक की गोलियों की आवाज़ थी
किसी सिपाही की बिछी लाश थी...
वो तिरंगे में लिपटी घर आई थी
कुछ चीथड़े थे, कुछ बची राख थी...
उस माँ की सिसकी बेआवाज़ थी
जिसकी बहू की सूनी माँग थी...
बूढ़े बाप की तबीयत नासाज़ थी
आँखों में उसे ज़िंदा देखने की आस थी...
कहीं वतन परस्ती के जलवे थे
तो कहीं डबडबाई हर आँख थी...
दहशतगर्दी के घटिया खेल में,
जाने किसकी जीत, किस की मात थी...
इंसानियत से बड़ी मज़हब की ज़ात थी
ज़िंदगी से सस्ती मौत की सौगात थी!
ऐ काश! उस दुनिया में ले चल..
जहाँ कभी चैन-ओ-अम्न की बात थी!
गार्गी सिंह
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