कवि का नाम -- डीसी त्रिपाठी ।
शीर्षक-- सच्चे रिश्ते ।
राज्य-- छत्तीसगढ़
#सच्चे_रिश्ते ।
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चराग़ बन कर हर दिलों को रोशन करना ।
वो कभी भूलेंगे कहाँ ,जो रोशनी में नहाया होगा ।।
जब भी ज़िंदगी के किसी मोड़ पर मिले होंगे ,
सच मानिए विछड़ कर पछताया होगा ।।
देखता रह गया अपलक जब तलक ओझल न हुए ।
मिलन की तड़प में आंखों से अश्क़ बहाया होगा ।।
ज़िंदगी छोटी सी मिली है अहमियत रिश्तों को दीजिए ।
नज़र अंदाज़ गर किया होगा ख़ुद को नज़रों में गिराया होगा ।।
गुज़ारिश करता हूँ अब तो गले लग जा #दिवाकर ।
लफ्ज़ ख़ामोश बैठे थे पर इशारों से बुलाया होगा ।।
मुआफ़ करना रिश्तों में उनकी नादान समझ को ,
यक़ीन है उनकी रूह ने कभी दिल में अरमान जगाया होगा ।।
#डीसी_त्रिपाठी ५/९/१९
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