Tuesday, September 3, 2019

छत्तीसगढ से कवि संतोष श्रीवास्तव सम की रचना- देश का वर्तमान सुधरे तुम से

नाम_ संतोष श्रीवास्तव सम
राज्य_  छत्तीसगढ
शीर्षक _  देश का वर्तमान सुधरे तुम से
मोबाइल _९९९३८१९४२९
शीर्षक _. देश का वर्तमान सुधरे तुमसे
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देश की दुर्दशा की ढूंढता हूं वजह मै,
देश पड़ा आज संकीर्णताओ के महासमर में।
मुझे नहीं है शौक गड़े मुर्दे उखाड़ने का,
मै चाहता हूं देश का वर्तमान सुधरे तुमसे।
हर आने वाला कल,
आज पर खड़ा है,
देश का वर्तमान माना,
उनके ही कर्मों पर गढा है,
चाहता नही मै उनके अंगभंग करूं,
मै चाहता हूं देश का वर्तमान सुधरे तुमसे।
हर समय एक सा न होता,
परिस्थितियों परिवर्तित होती है,
फेर कर सकता है मानव,
जो देश हित वो न दिखे,
बने संविधान को ही सिर्फ न रटना चाहता हूं,
चाहता हूं देश का वर्तमान सुधरे तुमसे।
देश बढ चले अमन पथ,
देश विकसित हो चले,
हर हाथ में काम हो ,
हर मन निर्मल जल बहे,
मै चाहता हूं देश का उद्धार,
और कुछ न चाहता हूं,
चाहता हूं देश का वर्तमान सुधरे तुमसे।
__ संतोष श्रीवास्तव सम।

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