बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
सीकर, राजस्थान।
9413086000
गीत विधा में एक नई रचना
शीर्षक - - - खामोश निगाहें
वो खामोश निगाहें तेरी,
थी जिनमें मोहब्बत मेरी,
क्यूँ सूनी-सूनी लगती है?
क्यूँ अधूरी कहानी लगती है?
छाया उनमें इक मौन क्यूँ?
राहु-ग्रसित हो सोम ज्यूँ,
करती हैं बयाँ आहें तेरी,
वो खामोश निगाहें तेरी,
थी जिनमें मोहब्बत मेरी,
रब रूठ गया तो क्या हो?
सब छूट गया तो क्या हो?
मैं हूँ हरदम तेरे संग ही,
भरूं जीवन में सब रंग ही,
मैं ले लूँ कराहें तेरी,
वो खामोश निगाहें तेरी,
थी जिनमें मोहब्बत मेरी,
क्यूँ सूनी-सूनी लगती है?
क्यूँ अधूरी कहानी लगती है?
छाया उनमें इक मौन क्यूँ?
राहु-ग्रसित हो सोम ज्यूँ।
वो खामोश निगाहें तेरी,
थी जिनमें मोहब्बत मेरी।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
खंडेला जिला सीकर राजस्थान 332709
9413086000
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