1.कवि का नाम - गिरिजा प्रसाद पाण्डे
2.शिर्षक - "नवाखानी"
3.राज्य - छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव)
4.सम्पर्क - 9691760900
"नवाखानी"
पातर होली बरखा,
फेर बले गिरेसे पानी।
निंदा-कोड़ा के सारून,
थेबालुँ खेती किसानी।
भाटा-टीकरा चो धान पाकली,
आनलूँ बरन-बानी।
हरीक-उदिम चो तीहार,
आजी आय नवाखानी ।।
नवा धान चो चिंवड़ा-चाँऊर,
अऊर पसीया-पानी ।
पुरखा मन के पुजा-पष्टा,
अऊर खिंडीक ढोगां थिपानी ।
देव डुमा के मना बुझा,
अऊर खिंडीक गारी सियानी ।
हरीक-उदिम चो तीहार,
आजी आय नवाखानी ।।
बस्तर राज चो सबले बड़े तिहार,
अमाउस,भादौंजतरा,नवाखानी।
कितरो बड़े जागती आसे येचो,
ठेट ले देश-दुनिया राजधानी ।
बाड़ती चो गोठ आय,
नंगत हओ अन्न पानी।
हरीक-उदिम चो तीहार,
आजी आय नवाखानी ।।
ढोकरा सियान धंगड़ा-धंगड़ी,
गाँव मुख्या लेका जुवानी ।
बठुन खातोर आय सबाय मिसुन,
नवा भात अरु दार बोबो खाले एके छानी ।
टिका मांडून भातीर,
भेट-घाट आरू चिना-जानी ।
हरीक-उदिम चो तीहार,
आजी आय नवाखानी ।।
गाँव-गाँव में सकलाऊन भातीन,
एक दुसर के ठाकुर जोहरानी।
अयी तो आय हमचो रित,
सपाय लोग लग मया अमरानी।
सपाय झन आँव बराबर,
कोनी निहाय बड़े-नानी ।
हरिक-उदिम चो तीहार,
आजी आय नवाखानी ।।
गिरिजा प्रसाद पाण्डे
कोण्डागाँव(बस्तर)
विशेषः-सपाय बस्तरीया, छत्तीसगढ़ीया दादा-दिदी मन के मचो पाण्डे बस्तरीया बाटले नवाखानी तीहार चो खुबे-खुबे बधाई🙏
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