नाम गजेंद्र द्विवेदी 'गिरीश'
निवास- भिलाई 3 (छ.ग.)
राज्य- छत्तीसगढ़
असर होता ही नहीं!!
मेरी दीवानगी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
अजब कहानी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
सुन रखी है तूने शायद बेरुख दुनिया की बातें,
तल्ख बयानी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
शब्दों से मधुवर्णीयां बनाने की कोशिशें की कई,
स्नेहिल चाशनी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
कब तक रखोगे कैद वफा को, इश्क को, कहो न,
आजाद रवानी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
रंगीन महफ़िलों सी सजी तेरी दुनिया ऐ दोस्त,
बोझिल वीरानी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
समंदर से लरजते जज्बात दिल में तेरे, पता है,
दरिया तूफानी का तुझपर असर होता ही नहीं।।
नादान दिल गिरीश का तेरी गलियों में फिरता है,
बिखरती जवानी का तुझपर असर होता ही नही।।
© गजेंद्र द्विवेदी 'गिरीश'
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