कवि श्री स्वपन बोस
शिर्षक मेरा गांव
मोबाइल ९३४०४३३४८१
राज्य छत्तीसगढ़
पहाड़ों के गोद में झील के किनारे बसा मेरा सुन्दर गांव है ।
साल वनों की सुन्दर छांव में
झुमते नाचते हैं, लोग मेरे गांव में ,
सब काम करते खेतों में ,हर पल लोग यह खुश होते हैं ,
पेड़ों पर बैठा कोयल देखो मधुर गीत सुनाते हैं ,
गांव से दुर , कहीं जाने को मन नहीं करता है
जाते भी हैं शहर में कभी तो गांव की याद
आते हैं ,
गांव में मेरे मां की हाथ की रोटी ,
बहुत मिठी लगती है ,
शहर के पांच सितारा होटल की पकवान
भी हमें सुहाती है,
गांव के दोस्तों का साथ , बड़ा अनोखा होता है ,
हर मुश्किल में साथ खड़े
होते दोस्त ,
सच्चा दोस्त के लिए ये दिल रोता है ,
गांव के इमली का पेड़ ।
गांव के वो खेत का मेड़ ।
वो बहती हवाएं
सब दिल को लुभाता है
मेरा गांव धरती पर स्वर्ग है ,
अब शहर में रहने को मन नहीं भाता है ।
शहर में चका चौंध तो चारों ओर होती है
पर गांव की भोले लोगों की
वह मुस्कान शहरों में कहा पाई जाती है ।
गांव के ग्वाले भी गीत खुशी के गुन
गुनाते है ,
शहरों में कहा समय लोगों के पास ,धन पद , कमानें को हर पल
लोग यह भागते है ,
अजीब है संसार के लोग चन्द्र तक तो पहुंच जाते हैं ,
पर खुद के दिल तक पहुंच नहीं पाते है ।
मेरे गांव के गलियारों में ,
पीपल के पेड़ के छांव में
वह पके पके अमरूद में ,
गांव की याद हमेशा आती है ।
गांव मेरा सबसे सुंदर है ,
दिल की हर धड़कन बताती है ।
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