कवि-गिरीश अधिकारी
शीर्षक-क्यों?
सम्पर्क.9917638771
राज्य- उत्तराखंड
कहकहे चारों तरफ से
लग रहे हैं आज क्यों?
अब डराने से लगे हैं
ये सुरीले साज क्यों?
हैं बुरे जो लोग उनकी
प्रबल ये आवाज क्यों?
और जो हैं लोग अच्छे
इस कदर नासाज क्यों?
कोई मुझको आ बताये
हो रहा ये आज क्यों?
रंग बदलते लोग सारे
आ रही ना लाज क्यों?
नेकी रोती और उसकी
दब गई आवाज क्यों?
और बदी के सिर सजे हैं
ये सुनहले ताज क्यों?
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गि.अ
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