Sunday, September 8, 2019

जगदलपुर, छत्तीसगढ़ से कवि अनिलशुक्ल की रचना- बूंद की महिमा

कवि _अनिलशुक्ल
शीर्षक-बूंद की महिमा
सम्पर्क_7828501850
स्थान_बस्तर जगदलपुर, छत्तीसगढ़

बूंद बूंद में जीवन भरा है,
बूंद के धार से हरित अन्नपूर्णा
का रूप धरती धरा है।
बूंद जब रौद्र रूप लेती है
तो तबाही  आने के आलम
से काँपती धरती धरा है।
बूंद जब सम्यक रूप लेती है
तो चलता जीवन खुशियों से
ढलता जीवन ख़ुशियों से
आनन्द से भर जाती धरती
धरा है।
बूंद जब पसीने का रूप लेती
तो मेहनत कस लोगों को
देख इठलाती ये धरती धरा है
बूंद जब मातृभूमि के रक्षा
के
लिये गिरती तो गर्वित हो अपने आप को सुरक्षित समझती धरती धरा है।
बूंद जब वैमनस्यता की
बोई जाती तो आने वाले
अलगाव टकराहट को देख
अकुलाती कांपती धरती धरा है।
बूंद जब लड़ियों का रूप धरती तो एकता के सूत्र में
बंधती धरती धरा है।
कह अनिलशुक्ल  बूंद बूंद
से ही घड़ा भरता ,भरती ,धरती
धरा है।

कवि अनिलशुक्ल बस्तर
छतिशगढ 9,9,19

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