1•कुन्दन पाटिल
2•मन शुन्य चित स्थिर
3•9826668572
4•मध्य प्रदेश(देवास)
मन शुन्य चित स्थिर
एक दिन मन शुन्य
चित मेरा स्थिर
विचारो की उमड़ी आंधी
गम्भीर चिंतन
कहा से कहा मैं आ गये
0से48पर आकर
आज सोचने पर
मैं विवश हो गया
बहुत कुछ खोया
बहुत कुछ पाया
खोने की शंका
हमेशा बनी रही
पाने की इछ्छा
गतीसिल बनी रही
यही ताना बाना
जीवन भर चलता रहा
आगे भी चलता रहेगा
ओर मैं क्यों ओर कैसे मे
खोकर रह गया
कहा कब मे उलझकर
रह गया
निरउत्रर हो
पुन: अपनी दुनिया मे
मैं फिर लोट गया।
कुन्दन पाटिल देवास
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