Thursday, September 12, 2019

बालोद,छ. ग. से कवि शैलेन्द्र चेलक की रचना इंसानियत हो इंसान में

नाम-शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक-इंसानियत हो इंसान में
मोबाइल - 9098518976
पता- पेंडरवानी, बालोद,छ. ग.

हिंसा न हिन्दू के पुराण में है, न मुस्लिम के कुरान में ,
व्यर्थ की लड़ाई नही चाही थी ,
गीता में श्रीकृष्ण भगवान ने
मैं तो बस यही कहूँगा कि
इंसानियत हो इंसान में

बेशक मंदिर -मस्जिद को तुम तोड़ो ,
न छोड़ो तुम ईमान को ,
इंसां का दिल कभी न तोड़ो ,
न तोड़ो तुम इंसान को ,
क्योंकि जिस दिल में ख़ुदा बसता है ,
उसे भी तो राम रचता है,
हिंसा बढ़ सकती हैं यारो धर्म की झूठी शान में
मैं तो बस यही कहूँगा इंसानियत हो इंसान में ,

राम-रहीम कि इस धरती पर ,
कुछ पाखंडी धर्म के दलाल ,
मन्दिर-मस्जिद के आड़ में ,
बिछाते इंसानियत के लिये जाल,
पर दीवाली में दिये जलाते मुस्लिम, हिन्दू रखते रोजे ,
होते हैं हिंदुस्तान में ,
मैं तो बस यही कहूँगा कि इंसानियत हो इंसान में,

कोई कहे मन्दिर हो अपना,
कोई देखे मस्जिद का सपना,
अस्पताल बन जाये वहां पे ,
फिर काहे किसी का खपना ?
मानवता का मान बढ़ाते  भगवान दिखे इंसान में ,
मैं तो बस यहीं कहूँगा इंसानियत हो इंसान में ..........

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