कवियत्री-अनिता सुभाष देशमुख
शीर्षक- *आराधना*
राज्य-छत्तीसगढ़(चंदना,राजिम)
करूँ आराधना निशदिन तेरी,
माँ सुन लो मेरी पुकार,
दुख पीड़ा को करके दूर,
कर दो माँ उद्धार।
तू ही कल्कि, तू ही भवानी,
तू ही है महिषासुर मर्दनी।
करके सेवा तेरी माँ,
करूँ मैं जय जयकार।
करूँ आराधना निशदिन तेरी
माँ सुन लो मेरी पुकार.....
दुखियों की तू बिगड़ी बनाती,
भक्तों पर अपने कृपा बरसाती।
सारे जग में तेरी महिमा,
माँ है अपरम्पार।
करूँ आराधना निशदिन तेरी,
माँ सुन ले मेरी पुकार.....
जब भी कोई विपदा आये,
माँ तू ही हमें बचाती है,
बिगड़े जीवन को सँवारकर,
तू खुशियों से हरसाती है।
जो भी मांगे तेरे बच्चे,
तू देती है उसे हरबार
करूँ आराधना निशदिन तेरी,
माँ सुन ले मेरी पुकार.....
जाता जो भी तेरे दर पर,
न आता कभी खाली है
बच्चे तेरे फूल के जैसे,
माँ तू इन सबकी माली है
जो भी करते तुझपर अर्पण,
तू प्रेम से करती तू स्वीकार,
करूँ आराधना निशदिन तेरी,
माँ सुन लो मेरी पुकार.....
*स्वरचित*
*अनिता सुभाष देशमुख*
*चंदना(छत्तीसगढ़)*
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